1. शहर में बसों की एंट्री होगी बंद, कंपू-मानसिक आरोग्यशाला जैसे बस स्टॉपेज होंगे खत्म, जाम से मिलेगी मुक्ति
  2. अंधविश्वास का खौफनाक खेल: मसान छुड़ाने के नाम पर तांत्रिक ने 6 माह के मासूम को दी धूनी, जलीं आंखों की कॉर्निया
  3. ग्वालियर में सड़कों पर मस्तानों की टोली: गलियों में दिखा होली का हुड़दंग, 2500 जवान-अफसर तैनात
  4. गुना में अभ्युदय जैन हत्याकांड: पिता ने कहा – पत्नी निर्दोष, पुलिस ने फंसाया; केस बंद करने की साजिश का आरोप
  5. ग्वालियर में मकान विवाद पर हिंसा: फायरिंग और पथराव के बाद इलाके में तनाव, पुलिस तैनात
  6. ग्वालियर में होली पर कड़ी निगरानी: संदिग्धों की होगी सघन चेकिंग, ड्रोन से रखी जाएगी नजर
  7. ग्वालियर में जानलेवा हुई शहर की सड़कें: देहात से ज्यादा खतरनाक, 49 प्वाइंट पर सालभर में 298 हादसे
  8. Gwalior कि Cyber Cell ने 60 लाख 25 हज़ार के मोबाइल किये बरामद!
  9. कांग्रेस नेता पर गंभीर आरोप, महिला ने दी आत्महत्या की धमकी
  10. सरकार के कारण कर्जे में डूबते किसान ?
news-details

इंदौर के मुकाबले क्यों पिछड़ा ग्वालियर, क्या बीजेपी सरकार कर रही है ग्वालियर चंबल संभाग के साथ भेदभाव !

हाल ही में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सबमिट (GIS ) जो कि भोपाल में आयोजित हुई उसके द्वारा जो भी इन्वेस्टमेंट होगा वह ज्यादातर इंदौर-भोपाल, इंदौर- भोपाल, रीवा- उज्जैन में किया जाएगा। इसमें ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए बहुत कम ना के बराबर ही इन्वेस्टमेंट आ पाया है कहीं ना कहीं इसमें mp की बीजेपी सरकार की भेदभाव पूर्ण नीति नजर आती है।

क्या बीजेपी सरकार कर रही है ग्वालियर चंबल संभाग के साथ भेदभाव ..

वैसे तो बीजेपी सरकार कहती है कि मध्य प्रदेश का चौमुखी विकास हो रहा हैलेकिनअभी की जो सरकार बीजेपी की बनी हुई हैइसका ज्यादातर फॉक्स इंदौर-भोपाल, इंदौर-भोपाल, इंदौर- भोपाल - उज्जैन तक सिमट कर रह गया है। पूरे मध्य प्रदेश में 55 जिले हैं किन्तु बीजेपी सरकार को सिर्फ इंदौर- भोपाल ही दिखता है आखिर ग्वालियर चम्बल से सरकार की ऐसी क्या नाराजगी है कि बड़े बड़े सभी प्रोजेक्ट मालवा को दिए जाते है। यूँ तो ग्वालियर से बड़े बड़े नेता , जनता के हिमायती बनते है। जनता के सेवक , जनता का कुत्ता, न जाने क्या क्या बोलते है लेकिन जब बात क्षेत्र के विकास की आती है तो टांय टांय फिस्स। ...
ग्वालियर संसद , विधायक जो मंत्री बने बैठे है उनकी चूं तक नहीं निकलती ग्वालियर के लिये, मप्र के सी एम के सामने। ग्वालियर के किसी भी बड़े नेता की आवाज विधानसभा में नहीं गूंजती या मुख्यमंत्री के दफ्तर तक पहुँचते पहुँचते आवाज दब जाती है .

अभी हाल ही में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सबमिट (GIS ) जो कि भोपाल में आयोजित हुई उसके द्वारा जो भी इन्वेस्टमेंट होगा वह ज्यादातर इंदौर-भोपाल, इंदौर- भोपाल, रीवा- उज्जैन में किया जाएगा। इसमें ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए बहुत कम ना के बराबर ही इन्वेस्टमेंट आ पाया है कहीं ना कहीं इसमें mp की बीजेपी सरकार की भेदभाव पूर्णनीति नजर आती है। और हमारे क्षेत्रीय नेता इनके सामने मौन धारण कर लेते है। ग्वालियर - चम्बल संभाग में कोई भी बड़ा औद्योगिक क्षेत्र नहीं है जहां पर जाके यहाँ के युवा रोजगार पा सके आज की सच्चाई ये कि ग्वालियर से युवा पलायन करने को मजबूर है। अहमदाबाद , सूरत , मुंबई , गोआ , बैंगलोर, दिल्ली , जयपुर जैसे शहरो में जाने के लिए मजबूर है , यहां कोई भी छोटा मोटा काम कर अपना जीवनयापन कर रहे है। हमारे mp में इंदौर को छोड़ कर कोई भी ऐसा जिला नहीं जहाँ पर 15 से 20 हज़ार तक की जॉब आसानी से मिल सके। क्या यही बीजेपी का सर्वांगीण विकास है जो सिर्फ आजकल उज्जैन में दिखाई दे रहा है।