ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट: इंदौर से आगे निकले भोपाल और उज्जैन, ग्वालियर–चंबल में सबसे कम निवेश प्रस्ताव
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिन तक चली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश प्रस्तावों की बौछार हुई, लेकिन इस बार निवेश का रुझान पारंपरिक औद्योगिक हब इंदौर की बजाय भोपाल और उज्जैन की ओर ज्यादा देखने को मिला। समिट में सबसे ज्यादा 5.82 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव भोपाल संभाग को मिले हैं। उज्जैन को 4.77 लाख करोड़, जबकि इंदौर को केवल 3.82 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
ग्वालियर-चंबल में निवेश की सुस्ती
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर और चंबल संभागों को निवेशकों ने कम तरजीह दी। इन क्षेत्रों में मात्र 1-1 निवेश प्रस्ताव ही मिले हैं, जिससे इन संभागों में औद्योगिक विकास की गति धीमी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, बुनियादी ढांचे की कमी और नए उद्योगों के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव इसकी प्रमुख वजह हो सकती है।
निवेश में बदलाव का कारण क्या?
इंदौर, जिसे मध्य प्रदेश का औद्योगिक केंद्र माना जाता है, इस बार निवेश के मामले में उज्जैन और भोपाल से पिछड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल को आईटी, शिक्षा, और बुनियादी ढांचे के विकास के चलते निवेशकों ने अधिक प्राथमिकता दी है। वहीं, उज्जैन में महाकाल लोक परियोजना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के कारण निवेश आकर्षित हुआ है।
कौन-कौन से सेक्टर को मिलेगा लाभ?
- भोपाल: आईटी, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमोबाइल सेक्टर
- उज्जैन: धार्मिक पर्यटन, होटल इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट
- इंदौर: पारंपरिक औद्योगिक सेक्टर, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग
- ग्वालियर-चंबल: कंस्ट्रक्शन और छोटे पैमाने के उद्योगों को सीमित निवेश
क्या यह निवेश धरातल पर उतर पाएगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिले निवेश प्रस्तावों का वास्तविक निवेश में बदलना कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिसमें सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन, उद्योगपतियों को दी जाने वाली सुविधाएं और बुनियादी ढांचा विकास की गति शामिल है।
हालांकि, भोपाल और उज्जैन इस बार निवेशकों की पहली पसंद के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य देखने को मिल सकते हैं।