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  3. ग्वालियर नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संपत्ति कर वसूली का लक्ष्य 175 करोड़ रुपये तय किया है। निगम पर 570 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि सरकारी विभागों पर भी करोड़ों रुपये लंबित हैं। वसूली तेज करने के लिए वार्ड स्तर पर सख्ती और साप्ताहिक समीक्षा शुरू की गई है।
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  6. ग्वालियर में कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन एएसपी राजेश सिंह चंदेल समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती, अवैध वसूली, धमकी और साक्ष्य मिटाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया। शिकायत में समझौते के नाम पर 30 लाख रुपये वसूलने का आरोप लगाया गया है।
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प्लॉट धोखाधड़ीः तीन जालसाजों को 7-7 साल की जेल, ‘चार चतुर एसोसिएट’ के निदेशकों पर जुर्माना

ग्वालियर में प्लॉट दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपए की ठगी करने वाले तीन आरोपियों को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने ‘चार चतुर एसोसिएट’ फर्म के संचालक गणेश ओझा, नारायणदास राठौर और अजय जादौन को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

प्लॉट धोखाधड़ीः तीन जालसाजों को 7-7 साल की जेल, ‘चार चतुर एसोसिएट’ के निदेशकों पर जुर्माना

ग्वालियर में प्लॉट दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपए की ठगी करने वाले तीन आरोपियों को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने ‘चार चतुर एसोसिएट’ फर्म के संचालक गणेश ओझा, नारायणदास राठौर और अजय जादौन को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों आरोपियों पर 5-5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए सख्त रुख अपनाया।

यह पूरा मामला ग्वालियर के पड़ाव थाना क्षेत्र का है, जहां ‘चार चतुर एसोसिएट’ नाम की फर्म द्वारा अंजनी धाम (फेज-1 से 5) सहित कई जगहों पर प्लॉट दिलाने का झांसा दिया गया। आरोपियों ने मनी बैंक योजना जैसी स्कीम का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए तैयार किया। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि कम समय में प्लॉट अलॉटमेंट के साथ अच्छा रिटर्न मिलेगा।

जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। वे लोगों को नकली अनुबंध, फर्जी रजिस्ट्री और प्लॉट के कागज दिखाकर विश्वास में लेते थे। इसके बाद उनसे मोटी रकम वसूल ली जाती थी। एक महिला से ही करीब 21 लाख रुपए की ठगी की गई, जबकि अन्य कई लोगों से भी लाखों रुपए ऐंठे गए।

पीड़ितों को न तो प्लॉट मिला और न ही उनकी जमा राशि वापस की गई। जब लोगों को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और पर्याप्त सबूत जुटाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच पूरी होने के बाद मामला अदालत में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद तीनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।

इस फैसले को रियल एस्टेट से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। इससे ऐसे मामलों में लिप्त लोगों के लिए सख्त संदेश गया है कि निवेश के नाम पर ठगी करने वालों को कानून बख्शेगा नहीं।