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CBI अफसर बनकर 2.52 करोड़ की ठगी: दिल्ली से 3 और आरोपी गिरफ्तार, 15 राज्यों के 300 खातों में घुमाया पैसा

ग्वालियर में साइबर ठगी के एक बड़े मामले में पुलिस को अहम सफलता मिली है। एयरफोर्स के 90 वर्षीय रिटायर्ड रेडियोलॉजिस्ट को CBI अधिकारी बनकर 2.52 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले गिरोह के तीन और आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है।

ग्वालियर में साइबर ठगी के एक बड़े मामले में पुलिस को अहम सफलता मिली है। एयरफोर्स के 90 वर्षीय रिटायर्ड रेडियोलॉजिस्ट को CBI अधिकारी बनकर 2.52 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले गिरोह के तीन और आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। इस केस में अब तक कुल 7 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को ग्वालियर लाकर कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर ली है, जहां उनसे रिमांड लेकर आगे पूछताछ की जाएगी।

क्राइम ब्रांच की जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम को पहले 5 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जिसके बाद इसे देश के 15 राज्यों के 300 से ज्यादा खातों में घुमा दिया गया। इन राज्यों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, असम और कर्नाटक शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) खुलवाकर उन्हें साइबर गैंग को बेचते थे और पूरा नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए संचालित होता था।

गिरफ्तार आरोपियों में हरीश गढ़वाल, सौरव यादव और शरद डेहरिया शामिल हैं, जो बैंक खातों के संचालन और ट्रांजेक्शन में सीधे तौर पर जुड़े थे। जांच में यह भी सामने आया कि इंडसइंड बैंक के एक खाते में 28 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। इसके अलावा “जिंग्गा क्रंच एंड स्नैक्स” नाम की एक फर्जी फर्म के खाते में भी बड़ी रकम जमा की गई, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। इस खाते के जरिए ट्रांजेक्शन करने पर संबंधित लोगों को कमीशन दिया गया था।

पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब आरोपियों ने व्हाट्सऐप कॉल कर खुद को CBI अधिकारी बताया और आधार-पैन के दुरुपयोग का डर दिखाकर बुजुर्ग डॉक्टर को “डिजिटल अरेस्ट” में ले लिया। 27 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखकर उनसे अलग-अलग खातों में 2.52 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। पीड़ित दंपति ने अपनी स्थिति बताई, लेकिन आरोपियों ने उनकी एक नहीं सुनी।

यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क और उसकी जटिलता को दर्शाता है, जहां तकनीक और फर्जी पहचान के जरिए बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क को पकड़ने के प्रयास में जुटी है।