ग्वालियर में ग्रीन पटाखों के नाम पर बड़ा सवाल! पैकेटों पर QR कोड नहीं, दुकानदारों को भी नहीं पता असली-नकली की पहचान
ग्वालियर के आतिशबाजी बाजार में ग्रीन पटाखों की पहचान पर सवाल। कई पैकेटों पर QR कोड नहीं दिखा, दुकानदारों को भी प्रमाणन की जानकारी नहीं। पढ़ें पूरी खबर।
ग्वालियर। दीपावली के बाद ग्वालियर के आतिशबाजी बाजार में बिकने वाले ग्रीन पटाखों की पहचान और प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बाजार में ऐसे पटाखों के पैकेट सामने आए हैं, जिन पर ग्रीन पटाखे होने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन कई पैकेटों पर आवश्यक QR कोड और स्पष्ट प्रमाणन संबंधी जानकारी दिखाई नहीं दे रही है।
हैरानी की बात यह है कि कुछ दुकानदारों को भी ग्रीन पटाखों की सही पहचान और QR कोड के महत्व की जानकारी नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बाजार में बिकने वाले पटाखे वास्तव में प्रमाणित ग्रीन पटाखे हैं या सिर्फ उनके नाम पर बिक्री की जा रही है?
क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?
ग्रीन पटाखे ऐसे विशेष प्रकार के पटाखे होते हैं, जिन्हें पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
इनके निर्माण में कुछ हानिकारक रसायनों और उत्सर्जन को कम करने पर ध्यान दिया जाता है।
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) ने कम उत्सर्जन वाले पटाखों की तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ग्रीन पटाखों का उद्देश्य पटाखों से निकलने वाले धुएं और हानिकारक उत्सर्जन को कम करना है। हालांकि, ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं होते।
पैकेटों पर QR कोड क्यों जरूरी है?
प्रमाणित ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए पैकेजिंग पर दिए गए QR कोड का महत्वपूर्ण उपयोग होता है।
इस कोड के माध्यम से संबंधित उत्पाद और उसके निर्माता की जानकारी सत्यापित की जा सकती है।
QR कोड से मिलने वाली जानकारी में निर्माता, उत्पाद तथा प्रमाणन से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, केवल पैकेट पर हरा रंग होने या ग्रीन पटाखा लिखे होने से किसी उत्पाद के प्रमाणित होने की गारंटी नहीं मिलती।
सही पहचान के लिए अधिकृत प्रमाणन और उत्पाद की जानकारी की जांच जरूरी है।
ग्वालियर के बाजार में दुकानदारों को भी नहीं पूरी जानकारी
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ग्वालियर के मेला आतिशबाजी बाजार में कुछ दुकानदारों से ग्रीन पटाखों के संबंध में बातचीत की गई।
एक दुकानदार ने बताया कि उनके यहां ग्रीन पटाखे उपलब्ध हैं। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे की जाती है, तो वह स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
दुकानदार का कहना था कि पैकेट पर ग्रीन क्रैकर्स लिखा होने से ही वह उसे ग्रीन पटाखा मानते हैं।
कुछ दुकानदारों ने QR कोड के बारे में भी जानकारी नहीं होने की बात कही।
क्या बिना QR कोड वाले पटाखे असली ग्रीन पटाखे हैं?
ग्रीन पटाखों के प्रमाणन और पहचान के लिए QR कोड एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
संबंधित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाजार में कुछ ऐसे पैकेट भी मिले, जिन पर QR कोड या स्पष्ट प्रमाणन संबंधी जानकारी नहीं दिखाई दी।
हालांकि, केवल पैकेट की तस्वीर या QR कोड दिखाई नहीं देने के आधार पर किसी विशेष उत्पाद को नकली घोषित नहीं किया जा सकता।
इसके लिए निर्माता की जानकारी, उत्पाद की प्रमाणन स्थिति और संबंधित रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी पर सवाल
रिपोर्ट में ग्वालियर के आतिशबाजी बाजार में ग्रीन पटाखों की पहचान को लेकर जागरूकता और निगरानी की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है।
यदि बाजार में बिना आवश्यक प्रमाणन के पटाखों को ग्रीन पटाखा बताकर बेचा जा रहा है, तो यह उपभोक्ताओं और पर्यावरण दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
ऐसे में संबंधित विभागों द्वारा उत्पादों के प्रमाणन की जांच और दुकानदारों को सही जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष दुकानदार या निर्माता के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रीन पटाखे खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
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पैकेट पर निर्माता का नाम और उत्पाद की जानकारी जांचें।
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प्रमाणन संबंधी विवरण और QR कोड की उपलब्धता देखें।
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QR कोड से प्राप्त जानकारी का मिलान आधिकारिक विवरण से करें।
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केवल ग्रीन क्रैकर्स लिखे होने पर उत्पाद को प्रमाणित न मानें।
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संदिग्ध उत्पादों की जानकारी संबंधित प्रशासनिक विभाग को दें।
ग्वालियर में ग्रीन पटाखों की जांच जरूरी
ग्रीन पटाखों को लेकर सामने आई जानकारी से बाजार में उत्पादों की पहचान, प्रमाणन और उपभोक्ता जागरूकता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
आवश्यकता है कि संबंधित विभाग बाजार में उपलब्ध पटाखों की प्रमाणन स्थिति की जांच करें, ताकि ग्राहकों को सही जानकारी मिल सके और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
Digital Gwalior News की अपील: पटाखे खरीदते समय उनकी प्रमाणन संबंधी जानकारी जरूर जांचें और पर्यावरण एवं सुरक्षा नियमों का पालन करें।