सम्राट मिहिर भोज की मूर्ति पर जाति से जुड़ा विवाद: हाईकोर्ट में सुनवाई 30 नवंबर तक टली, सीलबंद लिफाफे में पेश हुई समिति की रिपोर्ट
ग्वालियर में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर 'गुर्जर' शब्द से जुड़े विवाद की हाईकोर्ट में सुनवाई 30 नवंबर तक टली। समिति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के नामपट्ट पर लिखे 'गुर्जर' शब्द को लेकर चल रहे विवाद की सुनवाई एक बार फिर आगे बढ़ गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद मामले की अगली तारीख 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। वहीं, इस विवाद से संबंधित समिति की रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने प्रस्तुत की गई। मामले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग भी उठाई गई है।
सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर क्या है पूरा विवाद?
ग्वालियर में स्थापित सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के नामपट्ट पर 'गुर्जर' शब्द लिखे जाने को लेकर विवाद सामने आया था। इस शब्द के इस्तेमाल और ऐतिहासिक पहचान को लेकर अलग-अलग पक्षों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
सम्राट मिहिर भोज भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण शासकों में गिने जाते हैं। उनका संबंध नौवीं शताब्दी के गुर्जर-प्रतिहार राजवंश से माना जाता है। हालांकि, उनकी ऐतिहासिक पहचान और वर्तमान जातीय दावों के बीच संबंध को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रही हैं।
प्रतिमा के नामपट्ट पर लिखे शब्द से संबंधित विवाद न्यायालय तक पहुंच गया, जिसके बाद इस मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
ग्वालियर हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें
नईदुनिया की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
हालांकि, इस सुनवाई में मामले का अंतिम निपटारा नहीं हुआ और अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 तक टाल दी गई।
अब अगली तारीख पर मामले से जुड़े तथ्यों, कानूनी पहलुओं और प्रस्तुत दस्तावेजों पर आगे विचार होने की संभावना है।
सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की गई समिति की रिपोर्ट
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू संबंधित समिति की रिपोर्ट है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
हालांकि, रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकाले गए हैं और समिति ने क्या सिफारिशें की हैं, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि रिपोर्ट किस पक्ष के दावों का समर्थन करती है। समिति की रिपोर्ट को लेकर न्यायालय की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
याचिका में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग
सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा से जुड़ा विवाद केवल नामपट्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था के प्रश्न भी जुड़े हुए हैं।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मामले से संबंधित याचिका में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग की गई है।
ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि सभी पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए।
न्यायालय की कार्यवाही जारी रहने के दौरान शांति बनाए रखना और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।
सम्राट मिहिर भोज कौन थे?
सम्राट मिहिर भोज, जिन्हें भोज प्रथम के नाम से भी जाना जाता है, नौवीं शताब्दी में गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य के प्रमुख शासक थे।
उनका शासनकाल सामान्यतः लगभग 836 से 885 ईस्वी के बीच माना जाता है। उन्होंने उत्तर भारत में गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य की राजनीतिक शक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उनके शासनकाल में कन्नौज उत्तर भारत की राजनीति का एक प्रमुख केंद्र रहा।
इतिहासकारों के अनुसार, मिहिर भोज का शासन उत्तर भारत के मध्यकालीन इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि, उनके राजवंश के ऐतिहासिक नाम और आधुनिक जातीय पहचान को एक समान मानने के प्रश्न पर मतभेद मौजूद हैं।
अब 30 नवंबर की सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण?
सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा से जुड़े विवाद में अगली सुनवाई कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू समिति की वह रिपोर्ट है, जिसे सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
इसके अलावा, दोनों पक्षों की दलीलें और कानून-व्यवस्था से संबंधित मुद्दे भी न्यायिक विचार के विषय हैं।
हालांकि, अगली सुनवाई में अंतिम फैसला आएगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता।
क्या अगली सुनवाई में निकलेगा समाधान?
ग्वालियर में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के नामपट्ट पर लिखे 'गुर्जर' शब्द को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर निर्भर है।
दोनों पक्षों की दलीलों और समिति की रिपोर्ट के बाद अदालत आगे क्या निर्देश देती है, इस पर संबंधित पक्षों की नजर बनी हुई है।
फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित है। तब तक इस विवाद में किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष का दावा करना उचित नहीं होगा।
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