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ग्वालियर में मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था फेल, नालों की गंदगी और अतिक्रमण ने बढ़ाई शहरवासियों की मुश्किलें

ग्वालियर में मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था चरमराई। मुरार, थाटीपुर और लश्कर सहित प्रमुख इलाकों में नालों की गंदगी और अतिक्रमण से जलभराव का गहरा संकट। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मानसून के दस्तक देने में अब एक महीने से भी कम समय शेष है, लेकिन ग्वालियर की जल निकासी व्यवस्था अभी तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाई है। शहर के प्रमुख नालों पर बढ़ते अतिक्रमण, जर्जर ड्रेनेज सिस्टम और वर्षों से लंबित सुधार कार्यों के चलते इस बार भी शहर में भीषण जलभराव का खतरा मंडरा रहा है।

नगर निगम की तैयारियों का अंदाजा हाल ही में हुई महज आधे घंटे की बारिश से ही लग गया, जिसने शहर की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। मुरार, रेलवे स्टेशन, हजीरा और अन्य कई प्रमुख क्षेत्रों में पानी भर गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यदि तत्काल सुधार नहीं किए गए, तो मानसून के दौरान शहर की रफ्तार थम सकती है।

मुरार क्षेत्र: स्वर्णरेखा और मुरार जैसी नदियां अतिक्रमण और सिल्ट जमा होने से सिकुड़कर नालों में तब्दील हो गई हैं। बारादरी और सदर बाजार जैसे इलाकों में नालों की क्षमता कम होने से मामूली बारिश में ही सड़कें नदी का रूप ले लेती हैं, जिससे व्यापार और जनजीवन प्रभावित होता है।

थाटीपुर: सुरेश नगर, जीवाजी नगर और दर्पण कॉलोनी में नाले चोक होने और 20 फीट तक संकरे हो जाने के कारण बारिश का पानी सीधे कॉलोनियों और सड़कों पर जमा हो जाता है।

सिटी सेंटर: गोविंदपुरी, पटेल नगर, अनुपम नगर जैसे इलाकों में सड़कों और नालों की डिजाइन में खामियां हैं, जिसके कारण ढलान सही न होने से पानी निकासी नहीं हो पाती।

लश्कर: फालका बाजार, भैंसमंडी और जिंसी नाला क्षेत्र में जल निकासी का अभाव वर्षों से एक पुरानी समस्या बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रेनेज की खराब स्थिति के कारण मानसून में यातायात बाधित होने, दुर्घटनाएं बढ़ने और सड़कें उखड़ने के साथ-साथ जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम के पास जलभराव से निपटने की कोई प्रभावी वैकल्पिक योजना दिखाई नहीं दे रही है।

नगर निगम के अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव ने बताया कि पिछले साल जिन क्षेत्रों में जलभराव हुआ था, वहां प्राथमिकता के साथ सफाई कराई गई है। उन्होंने दावा किया कि सफाई के लिए एक विशेष शेड्यूल तैयार किया गया है और चारों विधानसभा क्षेत्रों में जेसीबी व पोकलेन मशीनों के जरिए लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है।

इसके बावजूद, शहरवासियों की मुख्य चिंता यह है कि मानसून की पहली तेज बारिश से पहले व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू होनी चाहिए, अन्यथा ग्वालियर को एक बार फिर अव्यवस्था और जाम का सामना करना पड़ सकता है।