सिंधिया राजपरिवार संपत्ति विवाद: ₹41 हजार करोड़ के समझौते पर प्रतिमा देवी ने उठाए सवाल, हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराने का आरोप
ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार की ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति के समझौते पर प्रतिमा देवी राणा ने धोखाधड़ी का आरोप लगाया। जानिए कोर्ट में सुनवाई की पूरी खबर।
Gwalior News: ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे बहुचर्चित कानूनी विवाद में नया मोड़ सामने आया है। परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से तैयार किए गए समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) पर अब गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्माराजे की सुपुत्री प्रतिमा देवी राणा ने आरोप लगाया है कि समझौता प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए गए थे। उन्होंने न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर इस समझौते पर आपत्ति दर्ज कराई है।
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को ग्वालियर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में इस मामले की सुनवाई निर्धारित है। इस दौरान प्रतिमा देवी राणा के बयान दर्ज किए जाने और उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
क्या है सिंधिया राजपरिवार का 41 हजार करोड़ रुपये का संपत्ति विवाद?
ग्वालियर का सिंधिया राजपरिवार लंबे समय से अपनी पारिवारिक संपत्तियों के बंटवारे को लेकर कानूनी विवाद का सामना कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विवाद से जुड़ी संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 41 हजार करोड़ रुपये बताया गया है।
संपत्ति के अधिकार और बंटवारे को लेकर परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच लंबे समय से न्यायालय में मामला चल रहा है।
हाल ही में इस विवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से परिवार के संबंधित पक्षों ने आपसी सहमति से एक समझौता प्रस्ताव तैयार किया था।
यह प्रस्ताव न्यायालय में भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन प्रतिमा देवी राणा की आपत्ति के बाद समझौते को लेकर नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है।
प्रतिमा देवी राणा ने समझौते पर क्यों उठाए सवाल?
प्रतिमा देवी राणा ने न्यायालय में आवेदन देकर आरोप लगाया है कि संपत्ति विवाद के समाधान के लिए तैयार समझौता प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर उनकी वास्तविक सहमति के बिना, धोखाधड़ी से कराए गए थे।
उनका कहना है कि उन्होंने इस समझौते को अपनी स्वतंत्र सहमति से स्वीकार नहीं किया था।
उन्होंने न्यायालय से अपनी आपत्ति पर विचार करने और संपत्ति विवाद में अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की है।
प्रतिमा देवी राणा संपत्ति में अपनी हिस्सेदारी का दावा भी कर रही हैं।
हालांकि, हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए जाने का आरोप अभी न्यायिक जांच और विचार का विषय है।
वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे ने आरोपों से किया इनकार
प्रतिमा देवी राणा के आरोपों के जवाब में परिवार की तीन वरिष्ठ सदस्याओं ने न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया है।
इनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और ऊषा राजे शामिल हैं।
तीनों की ओर से प्रस्तुत जवाब के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर सभी संबंधित पक्षों की सहमति से किए गए थे।
उनका कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद परिवार के सदस्य एक साथ मौजूद रहे थे।
इसके बाद पारिवारिक डिनर का आयोजन हुआ था और तस्वीरें भी ली गई थीं।
इस आधार पर उन्होंने प्रतिमा देवी राणा के धोखाधड़ी संबंधी आरोपों से असहमति जताई है।
14 अक्टूबर की सुनवाई में क्या हुआ था?
इस मामले में 14 अक्टूबर 2026 को भी न्यायालय में सुनवाई हुई थी।
उस दौरान प्रतिमा देवी राणा की ओर से प्रस्तुत आपत्ति और साक्ष्य संबंधी विषयों पर विचार किया गया था।
न्यायालय ने उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करने और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की थी।
इसी क्रम में 29 अक्टूबर को प्रतिमा देवी राणा के बयान दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
पहले एकपक्षीय घोषित किए गए थे संबंधित पक्षकार
संपत्ति विवाद के मूल मामले में दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राणा को भी पक्षकार बनाया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व में न्यायालय की सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया गया था।
इसके बाद परिवार के अन्य संबंधित सदस्यों के बीच समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
हालांकि, प्रतिमा देवी राणा ने बाद में न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर समझौते पर आपत्ति दर्ज कराई।
अब न्यायालय ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
सिंधिया परिवार के संपत्ति विवाद में किसका क्या पक्ष है?
प्रतिमा देवी राणा का पक्ष: उनका आरोप है कि समझौते पर हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए गए। वह संपत्ति में अपने अधिकार और हिस्सेदारी का दावा कर रही हैं।
वसुंधरा राजे का पक्ष: न्यायालय में प्रस्तुत जवाब के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर आपसी सहमति से हुए थे।
यशोधरा राजे और ऊषा राजे का पक्ष: दोनों ने भी समझौते को सहमति से किया गया बताते हुए धोखाधड़ी के आरोपों से इनकार किया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इस राजपरिवार के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इस विशेष आपत्ति पर उनका कोई नया बयान सामने नहीं आया है।
क्या 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का समझौता प्रभावित होगा?
प्रतिमा देवी राणा की आपत्ति के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि परिवार के बीच तैयार समझौता प्रस्ताव पर आगे क्या निर्णय होगा।
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य इस मामले की आगामी कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि किसी समझौते की वैधता या हस्ताक्षर की सहमति पर विवाद उत्पन्न होता है, तो न्यायालय संबंधित परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करता है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि समझौता प्रस्ताव निरस्त होगा या उसे न्यायालय की स्वीकृति मिलेगी।
अब आगे क्या होगा?
29 अक्टूबर को निर्धारित सुनवाई में प्रतिमा देवी राणा को अपना पक्ष स्पष्ट करने और आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना है।
इसके बाद न्यायालय संबंधित पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए आगे की प्रक्रिया तय कर सकता है।
ग्वालियर के इस बहुचर्चित राजपरिवार के संपत्ति विवाद पर अब सभी की नजरें न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं।
निष्कर्ष: सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े विवाद में प्रतिमा देवी राणा की आपत्ति ने समझौते की प्रक्रिया को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर प्रतिमा देवी ने हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराने का आरोप लगाया है, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों ने समझौते को आपसी सहमति से हुआ बताया है। अब न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्य और आगे की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेंगे।
Digital Gwalior News — हर खबर, आपकी उंगलियों पर।
संपादकीय नोट: यह समाचार 29 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। संपत्ति का मूल्य रिपोर्ट में दिया गया अनुमान है। धोखाधड़ी संबंधी आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं। इस रिपोर्ट में सुनवाई के अंतिम परिणाम का दावा नहीं किया गया है।